मऊ से जुड़े एक मामले में लोकसभा की विशेषाधिकार समिति ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (वर्तमान एसएसपी, एटा) इलामरन, सरायलखंसी के तत्कालीन थाना प्रभारी राज कुमार सिंह और जिला अस्पताल मऊ के ईएनटी सर्जन डॉ. सौरभ त्रिपाठी को व्यक्तिगत रूप से समिति के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
लोकसभा सचिवालय की ओर से 23 जुलाई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, तीनों अधिकारियों को 5 अगस्त 2026 को दोपहर 3 बजे नई दिल्ली स्थित संसद भवन एनेक्सी एक्सटेंशन के समिति कक्ष संख्या-2 में मौखिक साक्ष्य (Oral Evidence) प्रस्तुत करना होगा।
यह कार्रवाई सांसद राजीव राय द्वारा 22 अक्टूबर 2024 को लोकसभा की विशेषाधिकार समिति में दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर की गई है। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ बिना किसी वैधानिक आधार के एफआईआर दर्ज की गई। साथ ही संबंधित अधिकारियों पर उनके साथ पक्षपातपूर्ण, अपमानजनक और संसदीय गरिमा के प्रतिकूल व्यवहार करने का आरोप भी लगाया था। सांसद ने इसे अपने विशेषाधिकारों का गंभीर हनन बताते हुए समिति से कार्रवाई की मांग की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों ने समिति के समक्ष अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। हालांकि, समिति ने उस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए समिति ने तीनों अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक समझी और उन्हें मौखिक साक्ष्य देने के लिए नोटिस जारी कर दिया।
कार्यालय ज्ञापन में लोकसभा सचिवालय ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय को भी निर्देश दिया है कि निर्धारित तिथि पर संबंधित अधिकारियों की समिति के समक्ष उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए। इसके अलावा 31 जुलाई 2026 तक उनकी उपस्थिति की पुष्टि लोकसभा सचिवालय को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस ज्ञापन की प्रतिलिपि उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), संबंधित अधिकारियों और सांसद राजीव राय को भी भेजी गई है।
लोकसभा विशेषाधिकार समिति द्वारा अधिकारियों के लिखित स्पष्टीकरण को पर्याप्त न मानते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाना इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। अब 5 अगस्त को होने वाली सुनवाई और मौखिक साक्ष्य के आधार पर समिति आगे की संसदीय कार्रवाई पर निर्णय लेगी।



